PESA व्यवस्था 2026: PESA Act, ग्राम सभा के अधिकार और झारखंड में पूरी जानकारी
PESA व्यवस्था भारत के अनुसूचित क्षेत्रों में स्थानीय स्वशासन और ग्राम सभा की भूमिका को मजबूत करने वाली महत्वपूर्ण व्यवस्था है। PESA का पूरा नाम Provisions of the Panchayats (Extension to the Scheduled Areas) Act, 1996 है।
Panchayats (Extension to the Scheduled Areas) Act, 1996
इस कानून का उद्देश्य अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायत व्यवस्था का विस्तार करते हुए स्थानीय समुदायों और ग्राम सभाओं को कानून के अनुसार अधिकार एवं जिम्मेदारियां देना है।
- PESA व्यवस्था क्या है?
- PESA Act 1996 क्या है?
- PESA किन क्षेत्रों में लागू होता है?
- PESA में ग्राम सभा की भूमिका
- ग्राम सभा के प्रमुख अधिकार
- प्राकृतिक संसाधनों से संबंधित भूमिका
- भूमि और स्थानीय संसाधनों से संबंधित अधिकार
- लघु खनिज और स्थानीय विषय
- परंपराओं और संस्कृति की सुरक्षा
- झारखंड में PESA व्यवस्था
- झारखंड PESA Rules 2025
- PESA व्यवस्था क्यों महत्वपूर्ण है?
- अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
PESA व्यवस्था क्या है?
PESA व्यवस्था वह कानूनी व्यवस्था है जिसके माध्यम से पंचायतों से संबंधित संवैधानिक प्रावधानों को संविधान की पांचवीं अनुसूची के अनुसूचित क्षेत्रों तक विशेष प्रावधानों के साथ विस्तारित किया गया।
PESA Act, 1996 के माध्यम से अनुसूचित क्षेत्रों में स्थानीय स्वशासन और ग्राम सभा की भूमिका को विशेष महत्व दिया गया है।
PESA Act 1996 क्या है?
PESA Act 1996 संसद द्वारा बनाया गया कानून है। इसका उद्देश्य संविधान के Part IX में पंचायतों से संबंधित प्रावधानों को अनुसूचित क्षेत्रों तक विशेष संशोधनों और अपवादों के साथ लागू करना है।
PESA Act को 24 दिसंबर 1996 को अधिनियमित किया गया था और इसका संबंध पांचवीं अनुसूची के अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायत व्यवस्था से है।
PESA किन क्षेत्रों में लागू होता है?
PESA मुख्य रूप से संविधान की पांचवीं अनुसूची के अनुसूचित क्षेत्रों में लागू होता है। इसलिए किसी राज्य का पूरा क्षेत्र अपने-आप PESA क्षेत्र नहीं माना जाता।
पंचायती राज मंत्रालय की राज्यवार सूची में झारखंड के कई जिलों को पांचवीं अनुसूची के अनुसूचित क्षेत्र के रूप में दर्ज किया गया है।
| राज्य | PESA क्षेत्र से संबंधित स्थिति |
|---|---|
| झारखंड | राज्य के कई जिले पांचवीं अनुसूची के अनुसूचित क्षेत्रों में आते हैं। |
| छत्तीसगढ़ | कई जिले अनुसूचित क्षेत्रों में आते हैं। |
| मध्य प्रदेश | कई जिले/क्षेत्र पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आते हैं। |
| महाराष्ट्र | निर्धारित अनुसूचित क्षेत्रों में PESA व्यवस्था लागू होती है। |
PESA में ग्राम सभा की भूमिका
PESA व्यवस्था में ग्राम सभा को विशेष महत्व दिया गया है। अनुसूचित क्षेत्रों में स्थानीय समुदाय की परंपराओं, सामाजिक व्यवस्था और सामुदायिक संसाधनों को ध्यान में रखते हुए ग्राम सभा की भूमिका निर्धारित की गई है।
PESA के तहत ग्राम सभा की शक्तियां संबंधित केंद्रीय कानून तथा राज्य द्वारा बनाए गए PESA कानून/नियमों के अनुसार लागू होती हैं।
PESA के तहत ग्राम सभा के प्रमुख अधिकार
| क्षेत्र | ग्राम सभा की भूमिका |
|---|---|
| 🏘️ स्थानीय स्वशासन | स्थानीय मामलों में ग्राम सभा की भागीदारी और निर्णय प्रक्रिया को मजबूत करना। |
| 🌳 प्राकृतिक संसाधन | स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों के संबंध में कानून द्वारा निर्धारित भूमिका। |
| 🌾 परंपराएं | परंपरागत व्यवस्थाओं और सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण में भूमिका। |
| ⚖️ स्थानीय विवाद | कानून के अनुसार स्थानीय विवादों के समाधान में पारंपरिक व्यवस्था की भूमिका। |
| 📋 योजनाएं | स्थानीय विकास योजनाओं और कार्यक्रमों में ग्राम सभा की भागीदारी। |
| 💰 स्थानीय संसाधन | स्थानीय संसाधनों और ग्राम स्तर की आर्थिक गतिविधियों से जुड़े मामलों में निर्धारित भूमिका। |
प्राकृतिक संसाधनों से संबंधित भूमिका
अनुसूचित क्षेत्रों में जल, जंगल और जमीन जैसे स्थानीय संसाधनों का समुदाय के जीवन और आजीविका से महत्वपूर्ण संबंध होता है। PESA व्यवस्था में ग्राम सभा को कानून के अनुसार प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है।
झारखंड के संदर्भ में PESA Rules के लागू होने के बाद ग्राम सभा की भूमिका को लेकर प्राकृतिक संसाधनों और स्थानीय स्वशासन पर विशेष ध्यान दिया गया है।
भूमि और स्थानीय संसाधनों से संबंधित अधिकार
PESA व्यवस्था अनुसूचित क्षेत्रों में भूमि और सामुदायिक हितों की सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों को विशेष महत्व देती है।
विशेष रूप से भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास तथा स्थानीय विकास से जुड़े मामलों में ग्राम सभा/उचित स्तर की पंचायत की भूमिका संबंधित कानूनों के अनुसार निर्धारित होती है।
लघु खनिज और स्थानीय विषय
PESA में ग्राम सभा और पंचायतों को अनुसूचित क्षेत्रों में लघु खनिज से संबंधित मामलों में कानून के अनुसार भूमिका दी गई है।
खनन या खनिज से संबंधित किसी विशेष मामले में PESA के साथ-साथ लागू खनिज कानून, राज्य नियम और संबंधित विभागीय प्रावधानों को भी देखना आवश्यक है।
परंपराओं और संस्कृति की सुरक्षा
PESA व्यवस्था अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों की परंपराओं, सामाजिक एवं धार्मिक प्रथाओं, सामुदायिक संसाधनों और पारंपरिक विवाद समाधान प्रणालियों को ध्यान में रखती है।
इसका उद्देश्य स्थानीय स्वशासन को स्थानीय सामाजिक और सांस्कृतिक व्यवस्था के अनुरूप अधिक प्रभावी बनाना है।
झारखंड में PESA व्यवस्था
झारखंड में PESA व्यवस्था विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य के कई क्षेत्र संविधान की पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आते हैं। पंचायती राज मंत्रालय की राज्यवार सूची में झारखंड के कई जिले अनुसूचित क्षेत्रों के रूप में दर्ज हैं।
झारखंड सरकार के पंचायती राज विभाग के अनुसार विभाग का एक उद्देश्य पंचायतों और पंचायती राज संस्थाओं को मजबूत करना तथा स्थानीय स्वशासन को प्रभावी बनाना है।
झारखंड PESA Rules 2025
झारखंड के लिए PESA Rules–2025 पंचायती राज मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर PESA राज्यों द्वारा बनाए गए नियमों की सूची में दर्ज हैं।
पंचायती राज मंत्रालय की वर्तमान सूची में “The Provisions of the Panchayats (Extension to the Scheduled Areas) Jharkhand Rules – 2025” उपलब्ध है।
झारखंड आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार जनवरी 2026 में PESA Rules की अधिसूचना के बाद अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को प्राकृतिक संसाधनों, लघु खनिजों और स्थानीय विवाद समाधान जैसे विषयों में निर्धारित अधिकारों से जोड़ने की व्यवस्था को लागू किया गया।
झारखंड PESA में प्रमुख विषय
| विषय | महत्व |
|---|---|
| ग्राम सभा | अनुसूचित क्षेत्रों में स्थानीय निर्णय प्रक्रिया का महत्वपूर्ण आधार। |
| प्राकृतिक संसाधन | कानून के अनुसार स्थानीय संसाधनों से संबंधित भूमिका। |
| लघु खनिज | निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अंतर्गत ग्राम सभा/पंचायत की भूमिका। |
| स्थानीय विवाद | कानून के अनुसार पारंपरिक विवाद समाधान व्यवस्था को मान्यता। |
| स्थानीय संस्कृति | परंपराओं और सामुदायिक पहचान के संरक्षण पर जोर। |
सामान्य पंचायत व्यवस्था और PESA व्यवस्था में अंतर
| बिंदु | सामान्य पंचायत व्यवस्था | PESA व्यवस्था |
|---|---|---|
| क्षेत्र | सामान्य पंचायत क्षेत्र | अनुसूचित क्षेत्र |
| ग्राम सभा | संवैधानिक पंचायत व्यवस्था के अनुसार भूमिका | विशेष PESA प्रावधानों के अनुसार अतिरिक्त भूमिका |
| परंपरागत व्यवस्था | सामान्य पंचायत व्यवस्था | स्थानीय परंपराओं को विशेष महत्व |
| प्राकृतिक संसाधन | सामान्य कानूनी व्यवस्था | PESA के तहत निर्धारित विशेष भूमिका |
| स्थानीय स्वशासन | पंचायत कानून के अनुसार | PESA के विशेष प्रावधानों के साथ |
ग्राम सभा और PESA का संबंध
स्थानीय समुदाय की भागीदारी का प्रमुख मंच।
गांव के विकास और स्थानीय जरूरतों से संबंधित मामलों में भागीदारी।
कानून के अनुसार जल, जंगल और अन्य सामुदायिक संसाधनों से जुड़े मामलों में भूमिका।
स्थानीय परंपराओं और सामुदायिक पहचान के संरक्षण में भूमिका।
स्थानीय विकास और सार्वजनिक कार्यों में समुदाय की भागीदारी को मजबूत करना।
क्या PESA पूरे झारखंड में लागू है?
नहीं। PESA का संबंध संविधान की पांचवीं अनुसूची के अनुसूचित क्षेत्रों से है। इसलिए झारखंड के प्रत्येक जिले और प्रत्येक गांव को स्वतः PESA क्षेत्र नहीं माना जा सकता।
अपने गांव की PESA स्थिति जानने के लिए संबंधित अनुसूचित क्षेत्र की सरकारी अधिसूचना और राज्य सरकार की आधिकारिक जानकारी देखना चाहिए।
आम नागरिक के लिए PESA क्यों महत्वपूर्ण है?
- ग्राम सभा की स्थानीय भूमिका को समझने में मदद करता है।
- स्थानीय विकास योजनाओं में समुदाय की भागीदारी से जुड़ा है।
- स्थानीय परंपराओं और सामुदायिक व्यवस्था को महत्व देता है।
- प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े मामलों में निर्धारित ग्राम सभा की भूमिका को स्पष्ट करता है।
- अनुसूचित क्षेत्रों में स्थानीय स्वशासन की व्यवस्था को मजबूत करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
PESA का पूरा नाम Provisions of the Panchayats (Extension to the Scheduled Areas) Act, 1996 है।
PESA Act वर्ष 1996 में बनाया गया था और यह संविधान की पांचवीं अनुसूची के अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायत व्यवस्था के विस्तार से संबंधित है।
PESA मुख्य रूप से संविधान की पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आने वाले अनुसूचित क्षेत्रों में लागू होता है।
ग्राम सभा को स्थानीय स्वशासन, परंपराओं, सामुदायिक संसाधनों और कानून में निर्धारित अन्य विषयों में विशेष भूमिका दी गई है।
झारखंड के अनुसूचित क्षेत्रों के लिए PESA व्यवस्था लागू है और राज्य के लिए PESA Rules–2025 भी अधिसूचित किए गए हैं।
ये झारखंड के अनुसूचित क्षेत्रों में PESA Act के प्रावधानों को लागू करने के लिए बनाए गए राज्य नियम हैं।
नहीं। PESA का संबंध पांचवीं अनुसूची के अनुसूचित क्षेत्रों से है, इसलिए पूरे राज्य को PESA क्षेत्र नहीं माना जाता।
अनुसूचित क्षेत्रों में स्थानीय प्राकृतिक और सामुदायिक संसाधनों से जुड़े मामलों में ग्राम सभा की निर्धारित भूमिका PESA व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
निष्कर्ष
PESA व्यवस्था अनुसूचित क्षेत्रों में स्थानीय स्वशासन को मजबूत करने वाली महत्वपूर्ण कानूनी व्यवस्था है। इसमें ग्राम सभा को स्थानीय परंपराओं, सामुदायिक संसाधनों और विकास से जुड़े कई विषयों में कानून के अनुसार विशेष भूमिका दी गई है।
झारखंड के लिए PESA Rules–2025 वर्तमान आधिकारिक रिकॉर्ड में उपलब्ध हैं और 2026 में इनके लागू होने के बाद राज्य के अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा की भूमिका से संबंधित व्यवस्था और महत्वपूर्ण हो गई है।